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स्वागत

आपका स्वागत है माली सैनी समाज की वेबसाइट पर । इस पर माली सैनी समाज के बन्धुओं के नाम, पतें, शिक्षा, विवाहित-अविवाहित, व्यवसाय, दूरभाष नम्बर, ई-मेल आदि जानकारी उपलब्ध है। हम इस वेबसाइट के माध्यम से समाज को भेदभाव से मुक्त करना चाहते है। जिससे हमारा समाज देश की एकता और विकास का हिस्सा बन सकें। इस वेबसाइट के माध्यम से हम पूरे समुदाय के लिए एक मंच तैयार करने की कोशिश कर रहें है। इससे दुनिया भर में स्थित समाज के सदस्यों के बीच संवाद स्थापित हो सकें। इसके माध्यम से पूरी दुनिया में समाज का कोई भी व्यक्ति, कहीं भी सूचना प्राप्त कर सकता है। साथ ही अपना विवरण भी दर्ज कर सकता है। हम चाहते है कि समाज का हर व्यक्ति इसके माध्यम से अपनी जानकारी साझा कर सकें तथा दूसरे व्यक्ति की सूचना से स्वयं भी लाभान्वित हो सकें।

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इतिहास

माली लोग काश्तकारी यानी खेती करने में ज्यादा होशियार है क्योकिं वे हर तरह का अनाज, साग-पात, फलफूल और पेड़ जो मारवाड़ में होते है, उनको लगाना और तैयार करना जानते है। इसी सबब से इनका दूसरा नाम बागवान है। बागवानी का काम मालियों या मुसलमान बागवानों के सिवाय और कोई नहीं जानता। माली बरखलाफ दूसरे करसों अर्थात् किसानों के अपनी जमीनें हर मौसम में हरीभरी रखते है। उनके खेतों में हमेषा पानी की नहरें बहा करती है और इस लिये ये लोग सजल गॉवों में ज्यादा रहते है। थली में इनकी संख्या बहुत कम है।

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प्रमुख माली सैनी व्यक्तित्व

Mr. Jyotiba Phule
श्री जोतिबा फुले

महात्मा जोतिराव गोविंदराव फुले (११ अप्रैल १८२७ - २८ नवम्बर १८९०) एक भारतीय समाजसुधारक, समाज प्रबोधक, विचारक, समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक तथा क्रान्तिकारी कार्यकर्ता थे। इन्हें महात्मा फुले एवं ''जोतिबा फुले के नाम से भी जाना जाता है। सितम्बर १८७३ में इन्होने महाराष्ट्र में सत्य शोधक समाज नामक संस्था का गठन किया।

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